Surajpur Archives - Evening daily Rihand Times https://www.rihandtimes.in/category/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/ Tue, 25 Aug 2026 11:03:11 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://www.rihandtimes.in/wp-content/uploads/2023/03/cropped-Rihand_times_logo-32x32.jpeg Surajpur Archives - Evening daily Rihand Times https://www.rihandtimes.in/category/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/ 32 32 प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, पेड़ पर एक ही दुपट्टे से लटकी मिली लाश https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/young-couple-commits-suicide/ Tue, 25 Aug 2026 11:03:11 +0000 https://www.rihandtimes.in/?p=29295 सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों की लाश एक ही पेड़ पर और एक ही दुपट्टे से फांसी के फंदे पर लटकी मिली। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर [...]

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सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक प्रेमी जोड़े ने आत्महत्या कर ली। दोनों की लाश एक ही पेड़ पर और एक ही दुपट्टे से फांसी के फंदे पर लटकी मिली। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।

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यह पूरा मामला लटोरी चौकी क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। मंगलवार सुबह दोनों की लाश कल्याणपुर के कोटबहरा जंगल में पेड़ में फांसी के फंदे पर लटकी हुई मिली, जिससे हड़कंप मच गया।
मामला दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों के शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल आत्महत्या के कारण का अभी खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरु कर दी है।

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फर्जी वन पट्टे के जरिए 25-30 हेक्टेयर भूमि हड़पने की साजिश नाकाम, एक महिला आरोपी गिरफ्तार https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/plot-to-usurp-25-30-hectares-of-land-using-forged-forest-land-leases-foiled/ Mon, 20 Jul 2026 14:51:44 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28974 सूरजपुर। 20 जुलाई। सूरजपुर जिले के ग्राम बुंदिया में कथित रूप से फर्जी वन पट्टे के माध्यम से लगभग 25 से 30 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा करने के प्रयास का मामला सामने आया है। मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद भटगांव पुलिस ने एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, [...]

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सूरजपुर। 20 जुलाई।
सूरजपुर जिले के ग्राम बुंदिया में कथित रूप से फर्जी वन पट्टे के माध्यम से लगभग 25 से 30 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा करने के प्रयास का मामला सामने आया है। मामले में राजस्व विभाग की जांच के बाद भटगांव पुलिस ने एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वहीं अन्य संदिग्ध दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार ने विस्तृत जांच कराई। जांच के दौरान एक प्रकरण में फुलकुवर पति बिरझु के नाम से जारी कथित वन पट्टा एवं ऋण पुस्तिका की मूल प्रतियां प्राप्त होने पर थाना भटगांव में अपराध पंजीबद्ध कराया गया।
पुलिस जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि खसरा नंबर 1402/1 के संबंध में प्रस्तुत वन पट्टा संदिग्ध एवं कथित रूप से फर्जी है। जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त भूमि पर पूर्व से दिनेश एवं ताराचंद का काबिज-कास्त होना बताया गया है तथा उनके परिवार द्वारा लंबे समय से खेती किए जाने की जानकारी सामने आई है।
भटगांव पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी फुलकुवर पति बिरझु को गिरफ्तार किया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

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स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण का आरोप, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/allegation-of-construction-despite-stay-order-demand-for-action-from-the-collector/ Fri, 17 Jul 2026 15:10:12 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28943 सूरजपुर। 17 जुलाई। जिले रामानुजनगर तहसील अंतर्गत ग्राम छिन्दिया में भूमि विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आवेदक बालेश्वर ने कलेक्टर सूरजपुर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर तहसीलदार के स्थगन आदेश के बावजूद अनावेदक द्वारा जबरन मकान का निर्माण करा लिया गया। शिकायत में दावा किया [...]

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सूरजपुर। 17 जुलाई।
जिले रामानुजनगर तहसील अंतर्गत ग्राम छिन्दिया में भूमि विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आवेदक बालेश्वर ने कलेक्टर सूरजपुर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर तहसीलदार के स्थगन आदेश के बावजूद अनावेदक द्वारा जबरन मकान का निर्माण करा लिया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि निर्माण कार्य रोकने के स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी दिन-रात मजदूर लगाकर तेजी से निर्माण कार्य पूरा किया गया।
शिकायत के अनुसार ग्राम छिन्दिया की संयुक्त खातेदारी भूमि, खसरा नंबर 2067, रकबा 0.1100 हेक्टेयर पर अनावेदक द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जे का प्रयास किया गया। विरोध करने पर आवेदक को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। शिकायत में उल्लेख है कि अनावेदक ने कहा कि जहां शिकायत करनी है कर दो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
आवेदक के अनुसार मामले को लेकर पूर्व में तहसीलदार रामानुजनगर के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस पर 11 जून 2026 को तहसीलदार ने संबंधित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी करते हुए तत्काल निर्माण रोकने के निर्देश दिए थे। साथ ही अनावेदक को 16 जून 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। आदेश की प्रति थाना प्रभारी रामानुजनगर एवं संबंधित हल्का पटवारी को भी आवश्यक पालन एवं कार्रवाई के लिए भेजी गई थी।
इसके बावजूद शिकायत में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया और मकान का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया। आवेदक का यह भी आरोप है कि थाना एवं राजस्व अमले द्वारा न्यायालय के आदेश का प्रभावी पालन नहीं कराया गया, जिससे निर्माण कार्य नहीं रुक सका।
शिकायत में कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, न्यायालय के स्थगन आदेश की अवमानना करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने, कथित अवैध निर्माण हटाने तथा संबंधित भूमि पर वैधानिक कब्जा दिलाने की मांग की गई है।
मामले में हल्का पटवारी अरविंद एक्का ने दूरभाष पर बताया कि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय से आवश्यक निर्देश प्राप्त होने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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प्रतापपुर के बाद अब ओड़गी में भी… करोड़ों की लागत से बन रहे एकलव्य आदर्श विद्यालय भवन में भ्रष्टाचार के आरोप https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/allegations-of-corruption-regarding-the-eklavya-model-residential-school-building/ Fri, 17 Jul 2026 15:00:24 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28939 ओड़गी। 17 जुलाई। सूरजपुर जिले में इन दिनों निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय विवादों के घेरे में है। प्रतापपुर विकासखंड में बन रहे आवासीय विद्यालय भवन में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद जांच पड़ताल में मामला उजागर होने के बाद भी अधिकारियों ने मामले को फिलहाल के लिये ठंडे बस्ते में डाल दिया [...]

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ओड़गी। 17 जुलाई।
सूरजपुर जिले में इन दिनों निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय विवादों के घेरे में है। प्रतापपुर विकासखंड में बन रहे आवासीय विद्यालय भवन में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद जांच पड़ताल में मामला उजागर होने के बाद भी अधिकारियों ने मामले को फिलहाल के लिये ठंडे बस्ते में डाल दिया है वहीं अब ऐसा ही एक मामला ओड़गी में भी सामने आया है जहां ग्राम पंचायत पालदनोली में बन रहा भवन विवादों के घेरे में है। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।
ग्राम पंचायत पालदलोनी के सरपंच ऋषि राज सिंह सहित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की लागत से गरीब आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बनाए जा रहे इस आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती जा रही है। उनका कहना है कि निर्माण में घटिया गुणवत्ता की ईंट, सीमेंट और अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य पिछले लगभग दो वर्षों से जारी है, लेकिन इसकी प्रगति बेहद धीमी है। उनका आरोप है कि निर्माण की रफ्तार कछुए की चाल जैसी है और गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं तथा चिनाई में मसाले में सीमेंट की मात्रा कम और रेत अधिक होने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना के बावजूद निर्माण स्थल पर आज तक सूचना पटल नहीं लगाया गया है। इससे परियोजना की स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य अवधि तथा संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने इसे पारदर्शिता के विपरीत बताते हुए तत्काल सूचना पटल लगाए जाने की मांग की है।
0 पूर्व विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी
भटगांव के पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की स्वीकृति उनके विधायक कार्यकाल में हुई थी। यह परियोजना क्षेत्र के गरीब एवं आदिवासी विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच, गुणवत्ता परीक्षण, नियमित तकनीकी निरीक्षण तथा निर्माण कार्य की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी बच्चों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण भवन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में निर्माण एजेंसी एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी लिया गया जिसमें पता चला कि यह कंपनी हरियाणा से संचालित होता हैं और इसके इंजीनियर भी वही के हैं जो एकाध बार ही कार्य स्थल पर पहुंचे हैं। जिससे गुणवत्ता पर सवालिया निशान बना हुआ है।

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खंडहर बन चुके स्कूल में 80 से अधिक आदिवासी बच्चे पढ़ने को मजबूर, जिम्मेदार बेखबर https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/over-80-tribal-children-forced-to-study-in-a-school-turned-into-ruins-authorities-oblivious/ Fri, 17 Jul 2026 14:52:37 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28933 प्रतापपुर। 17 जुलाई। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के बच्चों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं प्रतापपुर विकासखंड के चंदौरा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। यह विद्यालय अब शिक्षा [...]

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प्रतापपुर। 17 जुलाई।
एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के बच्चों तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है, वहीं प्रतापपुर विकासखंड के चंदौरा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। यह विद्यालय अब शिक्षा का मंदिर कम और खंडहर अधिक दिखाई देता है। बरसात के मौसम में इसकी जर्जर छत, उखड़ती दीवारें और टूटते प्लास्टर हर पल किसी बड़े हादसे का संकेत देते नजर आते हैं। इसके बावजूद यहां 80 से अधिक मासूम बच्चे प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पहली नजर में कोई भी इसे वर्षों से बंद पड़ा परित्यक्त भवन समझ बैठे। जगह-जगह दीवारों में दरारें, उखड़ा प्लास्टर, काई जमी दीवारें और कमजोर छत यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर शिक्षा विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? बरसात के दिनों में बच्चों और शिक्षकों के मन में हर समय यह भय बना रहता है कि कहीं भवन का कोई हिस्सा भरभराकर न गिर पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मरम्मत और भवन सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस विद्यालय की बदहाली देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वह राशि कहां खर्च हुई? यदि कहीं कार्य हुए भी हैं तो उनका लाभ इस विद्यालय तक क्यों नहीं पहुंचा?
बताया जाता है कि विद्यालय भवन की स्थिति ऐसी है कि कई बच्चे भय के कारण स्कूल आने से भी कतराते हैं। जो बच्चे शिक्षा के प्रति गंभीर हैं, वे मजबूरी में इसी खतरनाक भवन में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
चंदौरा का यह विद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है। सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर यहां साफ दिखाई देता है। ग्रामीणों ने शिक्षा अधिकारियों से विद्यालय भवन का निरीक्षण कर तत्काल उचित सुधार कार्य अथवा कार्यवाही करने की मांग की है अन्यथा निकट भविष्य में किसी गंभीर हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।

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कुदरगढ़ जा रही श्रद्धालुओं से भरी पिकअप पेड़ से टकराई, 13 घायल; 4 की हालत गंभीर https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/pickup-truck-carrying-pilgrims-to-kudargarh-crashes-into-a-tree-13-injured-4-in-critical-condition/ Fri, 17 Jul 2026 09:30:42 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28916 ओड़गी। 17 जुलाई। कुदरगढ़ धाम दर्शन के लिए जा रही श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप शुक्रवार को ओड़गी विकासखंड के बांक ग्राम पंचायत के घाट में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसा कुदरगढ़ धाम से लगभग 20 किलोमीटर पहले हुआ। दुर्घटना में 13 श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर [...]

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ओड़गी। 17 जुलाई। कुदरगढ़ धाम दर्शन के लिए जा रही श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप शुक्रवार को ओड़गी विकासखंड के बांक ग्राम पंचायत के घाट में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसा कुदरगढ़ धाम से लगभग 20 किलोमीटर पहले हुआ। दुर्घटना में 13 श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। अन्य घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओड़गी में जारी है। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के भुईमान क्षेत्र से करीब 40 श्रद्धालु पिकअप वाहन में सवार होकर मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए निकले थे। बांक घाट के पास पहुंचते ही वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर चीख-पुकार मच गई। प्रत्यक्षदर्शीयो के दवारा बताया कि पिकअप तेज रफ्तार में थी। घाट के मोड़ पर चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और पिकअप सीधे पेड़ से टकरा गई। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। 108 एंबुलेंस की सहायता से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओड़गी पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल चार लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।बताया जा रहा है कि पिकअप में क्षमता से अधिक श्रद्धालु सवार थे।

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निर्माण एजेंसी व ठेकेदारों की मनमानी के आगे पंगु बना प्रशासन https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/administration-rendered-helpless-by-the-arbitrary-actions-of-the-construction/ Tue, 14 Jul 2026 08:26:18 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28879 दो-दो जांच में खुलीं गंभीर संरचनात्मक खामियां फिर भी नहीं रुका करोड़ों का निर्माण प्रतापपुर। 14 जुलाई। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर के सरनापारा में निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (इएमआरएस) भवन निर्माण कार्य को लेकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दो अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों ने करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े [...]

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दो-दो जांच में खुलीं गंभीर संरचनात्मक खामियां फिर भी नहीं रुका करोड़ों का निर्माण

प्रतापपुर। 14 जुलाई।
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर के सरनापारा में निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (इएमआरएस) भवन निर्माण कार्य को लेकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दो अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों ने करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीएम प्रतापपुर के नेतृत्व में गठित 7 सदस्यीय जांच दल ने दो अलग-अलग समय पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य में अनेक तकनीकी, गुणवत्ता संबंधी एवं संरचनात्मक खामियां दर्ज की हैं। जांच प्रतिवेदन के अनुसार कुछ कमियां इतनी गंभीर प्रकृति की हैं कि संबंधित हिस्सों को ध्वस्त (डिस्मेंटल) कर पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता तक पड़ सकती है। इसके बावजूद आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण कार्य लगातार जारी है। अब शिकायतकर्ता चंद्रिका कुशवाहा एवं मनीष गुप्ता प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से निराश होकर पूरे मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि इस मामले में पहली जांच 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) सूरजपुर के आदेश पर एसडीएम प्रतापपुर की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय जांच समिति द्वारा की गई थी। इसके बाद दूसरी जांच 9 जून 2026 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) के 1 जून 2026 के आदेश के पालन में कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, अनुविभागीय अधिकारी एवं साइट इंजीनियर की उपस्थिति में संपन्न हुई। दोनों जांच प्रतिवेदनों में कई समान तकनीकी कमियां दर्ज की गयी थीं जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। करीब आठ माह बाद हुई दूसरी जांच में भी कई गंभीर कमियां दोबारा सामने आईं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी जिसके बाद जांच दल ने सभी कमियों को दूर कर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण कराने के निर्देश भी दिए थे।
उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता चंद्रिका कुशवाहा एवं मनीष गुप्ता की शिकायत पर 13 जून 2026 को सरगुजा संभाग आयुक्त कार्यालय ने भी तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। उस निरीक्षण में भी निर्माण गुणवत्ता, बीम, किचन स्ट्रक्चर, तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा व्यवस्था एवं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की विस्तृत जांच की गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विद्यालय भविष्य में आदिवासी क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का आवासीय शिक्षण संस्थान बनेगा। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल सही साबित होते हैं तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ जाएगा।
लगातार दो जांच प्रतिवेदनों, संभागीय जांच और आरटीआई से सामने आए तथ्यों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने शासन-प्रशासन के सभी स्तरों पर शिकायत की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब वे पूरे मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से कोर कटिंग टेस्ट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण कराया जा सके तथा दोषी अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

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सड़क पर कोयला वाहनों की कतार से हर पल मंडरा रहा हादसे का खतरा https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/the-constant-threat-of-accidents-looms-due-to-the-line-of-coal-laden-vehicles-on-the-road/ Mon, 13 Jul 2026 14:28:45 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28860 सूरजपुर। 13 जुलाई। एसईसीएल भटगांव क्षेत्र अंतर्गत महान-3 परियोजना के जगन्नाथपुर-खड़गवां मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की स्थिति गंभीर होती जा रही है। खदान के मुख्य मार्ग के दोनों ओर भारी कोयला वाहनों की लंबी कतारें लगी रहने से सड़क संकरी हो गई है। ऐसे में आम लोगों, दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों [...]

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सूरजपुर। 13 जुलाई।
एसईसीएल भटगांव क्षेत्र अंतर्गत महान-3 परियोजना के जगन्नाथपुर-खड़गवां मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की स्थिति गंभीर होती जा रही है। खदान के मुख्य मार्ग के दोनों ओर भारी कोयला वाहनों की लंबी कतारें लगी रहने से सड़क संकरी हो गई है। ऐसे में आम लोगों, दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और अन्य राहगीरों को प्रतिदिन जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और किसी भी समय बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकती है।
बारिश के मौसम में सड़क पर कीचड़, गड्ढे और फिसलन के कारण हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं। भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे अव्यवस्थित खड़े ट्रकों के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है, जिससे आमजन के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले सुरक्षा विभाग तथा संबंधित अधिकारी इस समस्या से भली-भांति अवगत होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रतिदिन इसी मार्ग से परियोजना के अधिकारी, इंजीनियर, प्रबंधक एवं अन्य कर्मचारी खदान तक पहुंचते हैं, लेकिन सड़क पर व्याप्त अव्यवस्था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये के कोयला उत्पादन और परिवहन के बीच आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं मिल रही है। सड़क पर अनियंत्रित ढंग से खड़े कोयला वाहनों के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है, जबकि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि एसईसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से इस समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। खदान क्षेत्र के बाहर भारी वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करने तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी संभावित बड़े हादसे से बचा जा सके।
फिलहाल जगन्नाथपुर-खड़गवां मार्ग की मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे में बदल सकती है।

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शिक्षा का अधिकार प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल, अंतिम सूची से 10 बच्चों के नाम गायब होने का आरोप https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/surajpur/questions-raised-over-right-to-education-rte-admission-process/ Sat, 11 Jul 2026 14:36:49 +0000 https://www.rihandtimes.in/?p=28854 सूरजपुर। 11 जुलाई। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, जमड़ी भैयाथान में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि पात्र होने के बावजूद 10 बच्चों के नाम अंतिम प्रवेश सूची में शामिल नहीं किए गए, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक [...]

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सूरजपुर। 11 जुलाई।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, जमड़ी भैयाथान में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि पात्र होने के बावजूद 10 बच्चों के नाम अंतिम प्रवेश सूची में शामिल नहीं किए गए, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। मामले को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार विद्यालय में आरटीई के तहत 30 बच्चों का प्रवेश होना था, लेकिन विभाग द्वारा केवल 20 बच्चों की सूची जारी की गई। शेष 10 बच्चों के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं होने से अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि कई बच्चों की स्थिति आरटीई पोर्टल पर ‘‘अलॉटेड टू स्कूल’’ प्रदर्शित हो रही है, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम विभाग की अंतिम सूची में नहीं हैं। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि इस संबंध में वे पिछले कई महीनों से जिला शिक्षा कार्यालय और विकासखंड शिक्षा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार अलग-अलग जानकारी देकर उन्हें एक-दूसरे के पास भेजा गया। उनका कहना है कि समस्या का समाधान करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी गोलमोल जवाब देते रहे, जिससे समय बीतता गया और बच्चों का प्रवेश अब तक नहीं हो सका।
अभिभावकों के अनुसार विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि आरटीई के तहत निर्धारित सीटों में कुछ बच्चों का प्रवेश हो चुका है, जबकि शेष रिक्त सीटों के लिए दूसरी सूची अभी जारी नहीं हुई है। ऐसे में विभाग और विद्यालय प्रशासन की ओर से दी जा रही जानकारी में भी विरोधाभास नजर आ रहा है।
मामले में समाधान नहीं मिलने पर अभिभावकों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अंतिम सूची तैयार करने का आधार सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा पात्र बच्चों को शीघ्र प्रवेश दिलाने की मांग की है।

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जनपद पंचायत भैयाथान में 6 माह से नहीं हुई सामान्य सभा की बैठक https://www.rihandtimes.in/chhattisgarh/surguja-division/no-general-council-meeting-has-been-held-at-the-bhaiyathan-janpad-panchayat-for-six-months/ Wed, 08 Jul 2026 13:35:56 +0000 http://www.rihandtimes.in/?p=28809 नियमों पर उठे सवाल, अध्यक्ष और सीईओ के बयानों में भी दिखा विरोधाभास सूरजपुर। 08 जुलाई। जनपद पंचायत भैयाथान में पिछले लगभग छह माह से सामान्य सभा की बैठक आयोजित नहीं होने का मामला अब गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। पंचायत राज व्यवस्था के प्रावधानों के अनुसार सामान्य सभा का नियमित अंतराल पर [...]

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नियमों पर उठे सवाल, अध्यक्ष और सीईओ के बयानों में भी दिखा विरोधाभास
सूरजपुर। 08 जुलाई।
जनपद पंचायत भैयाथान में पिछले लगभग छह माह से सामान्य सभा की बैठक आयोजित नहीं होने का मामला अब गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
पंचायत राज व्यवस्था के प्रावधानों के अनुसार सामान्य सभा का नियमित अंतराल पर आयोजन आवश्यक माना गया है। इसी बैठक के माध्यम से करोड़ों रुपये की लागत से संचालित सड़क, सीसी रोड, पुल-पुलिया, नाली, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी भवन, स्कूल भवन, पेयजल योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों की समीक्षा की जाती है। ऐसे में लगातार बैठक नहीं होने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन विकास कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, वित्तीय व्यय और विभागीय जवाबदेही की समीक्षा आखिर किस स्तर पर हो रही है।
लंबे समय से सामान्य सभा आयोजित नहीं होने के कारण जनपद पंचायत सदस्यों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं भी तेज हैं। लोगों का कहना है कि यदि सामान्य सभा समय पर होती तो विकास कार्यों की गुणवत्ता, लंबित भुगतान, विभिन्न योजनाओं की प्रगति, विभागीय कार्यों और जनहित के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा होती। ऐसे में बैठक लगातार टलने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में जब जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि सामान्य सभा आयोजित कराने पर विचार किया जा रहा था। उनके अनुसार 8 अगस्त को बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रायपुर जाने के कारण बैठक आयोजित नहीं हो सकी।
वहीं, जब इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता से जानकारी ली गई तो उन्होंने अलग स्थिति बताई। सीईओ ने कहा कि उनका रायपुर दौरा निरस्त हो गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि सामान्य सभा अब तक आयोजित नहीं हो पाने का मुख्य कारण जनपद पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाना है। उनके अनुसार दोनों की सहमति नहीं मिलने के कारण बैठक लगातार टलती रही और इसी वजह से सामान्य सभा आयोजित नहीं हो सकी।
अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बयानों में सामने आए इस विरोधाभास ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों का मानना है कि जिला प्रशासन को पूरे मामले का संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सामान्य सभा का आयोजन नियमानुसार नहीं किया गया है तो इसके कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए तथा शीघ्र सामान्य सभा आयोजित कर विकास कार्यों की सार्वजनिक समीक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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