दो-दो जांच में खुलीं गंभीर संरचनात्मक खामियां फिर भी नहीं रुका करोड़ों का निर्माण
प्रतापपुर। 14 जुलाई।
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर के सरनापारा में निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (इएमआरएस) भवन निर्माण कार्य को लेकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दो अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों ने करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसडीएम प्रतापपुर के नेतृत्व में गठित 7 सदस्यीय जांच दल ने दो अलग-अलग समय पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य में अनेक तकनीकी, गुणवत्ता संबंधी एवं संरचनात्मक खामियां दर्ज की हैं। जांच प्रतिवेदन के अनुसार कुछ कमियां इतनी गंभीर प्रकृति की हैं कि संबंधित हिस्सों को ध्वस्त (डिस्मेंटल) कर पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता तक पड़ सकती है। इसके बावजूद आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण कार्य लगातार जारी है। अब शिकायतकर्ता चंद्रिका कुशवाहा एवं मनीष गुप्ता प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से निराश होकर पूरे मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि इस मामले में पहली जांच 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) सूरजपुर के आदेश पर एसडीएम प्रतापपुर की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय जांच समिति द्वारा की गई थी। इसके बाद दूसरी जांच 9 जून 2026 को कलेक्टर (आदिवासी विकास) के 1 जून 2026 के आदेश के पालन में कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, अनुविभागीय अधिकारी एवं साइट इंजीनियर की उपस्थिति में संपन्न हुई। दोनों जांच प्रतिवेदनों में कई समान तकनीकी कमियां दर्ज की गयी थीं जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। करीब आठ माह बाद हुई दूसरी जांच में भी कई गंभीर कमियां दोबारा सामने आईं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी जिसके बाद जांच दल ने सभी कमियों को दूर कर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्माण कराने के निर्देश भी दिए थे।
उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता चंद्रिका कुशवाहा एवं मनीष गुप्ता की शिकायत पर 13 जून 2026 को सरगुजा संभाग आयुक्त कार्यालय ने भी तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। उस निरीक्षण में भी निर्माण गुणवत्ता, बीम, किचन स्ट्रक्चर, तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा व्यवस्था एवं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की विस्तृत जांच की गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विद्यालय भविष्य में आदिवासी क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का आवासीय शिक्षण संस्थान बनेगा। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल सही साबित होते हैं तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ जाएगा।
लगातार दो जांच प्रतिवेदनों, संभागीय जांच और आरटीआई से सामने आए तथ्यों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने शासन-प्रशासन के सभी स्तरों पर शिकायत की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब वे पूरे मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से कोर कटिंग टेस्ट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण कराया जा सके तथा दोषी अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

