ओड़गी। 17 जुलाई।
सूरजपुर जिले में इन दिनों निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय विवादों के घेरे में है। प्रतापपुर विकासखंड में बन रहे आवासीय विद्यालय भवन में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद जांच पड़ताल में मामला उजागर होने के बाद भी अधिकारियों ने मामले को फिलहाल के लिये ठंडे बस्ते में डाल दिया है वहीं अब ऐसा ही एक मामला ओड़गी में भी सामने आया है जहां ग्राम पंचायत पालदनोली में बन रहा भवन विवादों के घेरे में है। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।
ग्राम पंचायत पालदलोनी के सरपंच ऋषि राज सिंह सहित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की लागत से गरीब आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बनाए जा रहे इस आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती जा रही है। उनका कहना है कि निर्माण में घटिया गुणवत्ता की ईंट, सीमेंट और अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य पिछले लगभग दो वर्षों से जारी है, लेकिन इसकी प्रगति बेहद धीमी है। उनका आरोप है कि निर्माण की रफ्तार कछुए की चाल जैसी है और गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं तथा चिनाई में मसाले में सीमेंट की मात्रा कम और रेत अधिक होने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना के बावजूद निर्माण स्थल पर आज तक सूचना पटल नहीं लगाया गया है। इससे परियोजना की स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य अवधि तथा संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने इसे पारदर्शिता के विपरीत बताते हुए तत्काल सूचना पटल लगाए जाने की मांग की है।
0 पूर्व विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी
भटगांव के पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की स्वीकृति उनके विधायक कार्यकाल में हुई थी। यह परियोजना क्षेत्र के गरीब एवं आदिवासी विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच, गुणवत्ता परीक्षण, नियमित तकनीकी निरीक्षण तथा निर्माण कार्य की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी बच्चों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण भवन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में निर्माण एजेंसी एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी लिया गया जिसमें पता चला कि यह कंपनी हरियाणा से संचालित होता हैं और इसके इंजीनियर भी वही के हैं जो एकाध बार ही कार्य स्थल पर पहुंचे हैं। जिससे गुणवत्ता पर सवालिया निशान बना हुआ है।
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