सूरजपुर। 24 अगस्त।
विकासखंड प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नरोला की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण की कथित गड़बड़ी ने अब प्रशासन के साथ-साथ सियासत में भी हलचल मचा दी है। जांच में 348 क्विंटल चावल के साथ चना और शक्कर के स्टॉक में कथित भारी कमी और गबन का मामला सामने आने के बाद संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दुकान संचालन करने वाली समिति/समूह को निलंबित कर राशन वितरण की व्यवस्था फिलहाल धोन्धा की शासकीय उचित मूल्य दुकान से संबद्ध कर दी गई है।
लेकिन मामला केवल राशन दुकान की अनियमितता तक सीमित नहीं रहा। भाजपा मंडल अध्यक्ष गोविंदपुर का नाम सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित समिति के संचालन में उनकी भूमिका रही है और विवाद या शिकायत की स्थिति में वे समिति का बचाव करते रहे हैं। ऐसे में प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्तें के विधानसभा क्षेत्र में उनकी ही पार्टी से जुड़े मंडल अध्यक्ष का नाम इस मामले में सामने आने से राजनीतिक संरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच किसी एक समिति या कर्मचारी तक सीमित न रहे, बल्कि राशन दुकान के संचालन और पूरे मामले से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी व्यक्ति का नाम सामने आने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता। भाजपा मंडल अध्यक्ष अथवा किसी अन्य व्यक्ति की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारी विभागीय जांच, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि जुलाई और अगस्त माह का राशन कई पात्र हितग्राहियों को नहीं दिया गया। इसके साथ ही फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने जैसी गंभीर शिकायतें भी जांच अधिकारियों के समक्ष रखी गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब और आदिवासी परिवारों के हिस्से के राशन के साथ कथित तौर पर खेल किया गया। उनका आरोप है कि जब गरीब परिवार अपने हिस्से के चावल, चना और शक्कर के लिए भटक रहे थे, तब आखिर रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे पैदा हुआ?
शिकायत मिलने के बाद खाद्य विभाग हरकत में आया। अधिकारियों के निर्देश पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल मौके पर पहुंचीं और दुकान में उपलब्ध खाद्यान्न स्टॉक, वितरण पंजी तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान 348 क्विंटल चावल के साथ अन्य खाद्यान्न सामग्री में कथित कमी और अनियमितता के तथ्य सामने आने के बाद संबंधित समिति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई।
मामले को लेकर नरोला सहित आसपास के गांवों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन गरीब परिवारों का अधिकार है, कोई ऐसा माल नहीं जिसे कथित रूप से गायब कर दिया जाए और जरूरतमंदों को खाली हाथ लौटा दिया जाए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, राशन उठाव और वितरण के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं इस मामले में फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश पर संबंधित समिति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। जांच अभी जारी है और स्टॉक, वितरण व्यवस्था तथा दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब लिया जाएगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों एवं जिम्मेदारी के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की मांग साफ है, जांच निष्पक्ष हो, पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए और जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
गरीबों का निवाला छीनने वाले और राशन की हेराफेरी करने वालों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित समिति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रथम नोटिस जारी किया गया है। जवाब प्राप्त होने के बाद नियमानुसार विस्तृत जांच की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। मामले में जो भी लोग संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
-रेना जमील, कलेक्टर सूरजपुर

