नई दिल्ली: बांग्लादेश अपने मददगार पड़ोसी रहे भारत को परेशान करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। हाल ही में बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने भारत के सबसे बड़े दुश्मन चीन से सैन्य ड्रोन को लेकर हाथ मिला लिया है। चीन की मदद से बांग्लादेश सैन्य ड्रोन की फैक्ट्री लगाने जा रहा है। तकनीकी ट्रांसफर, MALE UAV प्रोडॅक्शन और भारत की सीमाओं के निकट चीन की भागीदारी वाला बांग्लादेश का यह सौदा नई दिल्ली की टेंशन बढ़ा सकता है।
वहीं, भारत भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम चिकननेक तक अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाने जा रहा है। भारत का यह प्रोजेक्ट आम यात्रियों के लिए लाइफलाइन बनने के साथ-साथ जंग या आपातकाल के दौरान सेना और साजोसामान की आवाजाही को भी सुरक्षित रखेगा।
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40 किलोमीटर तक अंडरग्राउंड रेल दौड़ाएगा भारत
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के मुताबिक, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि बंगाल से नॉर्थईस्ट तक रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को सुरक्षित करने का प्लान है। इस प्लान में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरे तकरीबन 40 किलोमीटर के हिस्से में अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाना भी शामिल है। इससे माना जा रहा है कि भारत की कमजोर नस माना जाने वाला चिकननेक मजबूत हो जाएगा।
बांग्लादेश में चीन की ड्रोन फैक्ट्री
कहां से कहां तक बिछाई जाएगी अंडरग्राउंड रेल
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लाइन पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और बिहार के किशनगंज को जोड़ते हुए बागडोगरा तक जाएगी। यह अंडरग्राउंड रूट डुमडांगी से बागडोगरा के बीच करीब 35.76 किलोमीटर तक फैला होगा। इसमें डुमडांगी और रंगपानी के बीच का 33.40 किमी का हिस्सा बेहद अहम है।

