रायपुर: अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, सरगुजा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता नंद कुमार साय ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विधेयक का विरोध करने वाले दलों की तुलना ‘महिषासुर’ से करते हुए चेतावनी दी है कि देश की महिलाएं जल्द ही ‘मां काली’ का रूप धारण कर ऐसे तत्वों का राजनीतिक संहार करेंगी।
नंद कुमार साय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से देश की आधी आबादी को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए प्रयत्नशील थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना भाजपा के मूल चिंतन का हिस्सा रहा है। साय के अनुसार, पार्टी दशकों से इस दिशा में काम कर रही थी और कई बार विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने का आग्रह भी किया गया था।
पूर्व अध्यक्ष ने क्षोभ जताते हुए कहा कि जिस विधेयक को पारित कराने के लिए इतने प्रयास किए गए, उसका जो परिणाम आया उसने सबको स्तब्ध कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के हठी और नकारात्मक रवैये के कारण यह महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया।
“विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध कर विकास की राह में बाधा डाली है। जिन्होंने भी इस बिल को रोका है, वे महिषासुर की भूमिका में हैं।”
अपने संबोधन में साय ने भारतीय संस्कृति और साहित्य का उल्लेख करते हुए महिलाओं के महत्व को रेखांकित किया
उन्होंने ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’ का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं सुख-समृद्धि का वास होता है।
कवि जयशंकर प्रसाद की पंक्तियों “नारी! तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में! पीयूष-स्रोत-सी बहा करो जीवन के सुंदर समतल में!” का भी उल्लेख किया।
पौराणिक कथा का संदर्भ देते हुए साय ने कहा कि जैसे महिषासुर से त्रस्त होने पर देवताओं ने मां दुर्गा की आराधना की थी और उन्होंने असुर का संहार किया था।
नंद कुमार साय ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि आरक्षण विरोधी ‘महिषासुर रूपी’ विपक्षियों के लिए देश का महिला समाज अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं जल्द ही मां काली का रूप लेकर इनका संहार करने आ रही हैं और इस परिणाम को अब कोई नहीं रोक सकता।
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