मनेंद्रगढ़। 11 जुलाई।
शहर के आस्था रेस्टोरेंट के पास बीपीसीएल की गैस पाइपलाइन परियोजना के दौरान हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने लोगो को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में ढाबा में काम करने वाले युवक की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना के बाद परिजनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मुआवजा, जेसीबी की जब्ती और आरोपी चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पहले सिटी कोतवाली में धरना प्रदर्शन किया गया और बाद में परिजन ने मृतक का शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। लगभग दो घंटे तक शहर का मुख्य मार्ग जाम रहा और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 जुलाई की रात राघवेंद्र अपने साथी सागर को स्कूटी से घर छोड़ने जा रहा था, जैसे ही वे नेशनल हाईवे 43 में स्थित आस्था रेस्टोरेंट के पास लगभग 8.20 बजे वहां बीपीसीएल की गैस पाइपलाइन परियोजना में लगी जेसीबी (क्रमांक एमपी 65 डीए 0197) ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि जेसीबी गलत दिशा से तेज गति और लापरवाहीपूर्वक चलाई जा रही थी, जिसके कारण यह भीषण हादसा हुआ।
इस हादसे में राघवेंद्र को सीने और बाएं हाथ में गंभीर चोटें आईं, जबकि सागर के पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए दोनों को जिला अस्पताल मनेंद्रगढ़ पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद राघवेंद्र को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल सागर को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
दुर्घटना के अगले दिन शनिवार सुबह मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सिटी कोतवाली पहुंचे। सुबह लगभग 10.30 बजे से धरना शुरू हुआ। परिजनों का आरोप है कि धरना शुरू होने के बाद करीब दो घंटे तक कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। लगभग 12 बजे सिटी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विवेक पाटले धरना स्थल पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
जब बातचीत विफल हो गई तो परिजनों ने मृतक का शव सिटी कोतवाली के सामने मुख्य सड़क पर रख दिया और वहीं सभी लोग धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। लगभग दो घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक, नायब तहसीलदार सहित आसपास के थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने परिजनों और प्रदर्शनकारियों से लंबी चर्चा की। काफी देर तक चली बातचीत के बाद अपर कलेक्टर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मृतक के परिजनों को तत्काल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, एंबुलेंस की व्यवस्था तथा शासन की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने सड़क से शव हटाया और यातायात बहाल हो सका।
इधर मृतक के परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि दुर्घटना की रात पुलिस दो लोगों को पूछताछ के लिए लेकर आई थी, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में जब से बीपीसीएल की गैस पाइपलाइन का काम शुरू हुआ है, तब से कई स्थानों पर सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। कई जगह पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारी मशीनें भी कई बार सड़क पर या गलत दिशा में खड़ी दिखाई देती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
घटना के बाद पुलिस द्वारा जेसीबी की तलाश की जा रही है पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 106(1),125(ए) एवम 281 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना किया जा रहा है।
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