गिरदावरी में लापरवाही और पोर्टल नहीं खुलने का हवाला देकर किसानों को किया जा रहा परेशान, तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर अन्नदाता
प्रतापपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड सहित पूरे क्षेत्र के दर्जनों गांवों में इन दिनों सैकड़ों किसान अपनी धान की फसल को लेकर गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। किसानों के खेतों में धान की फसल लहलहा रही है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी फसल का रकबा शून्य दर्ज होने से अब उनके सामने समर्थन मूल्य पर धान बेचने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। गिरदावरी में कथित लापरवाही के कारण खेतों में खड़ी फसल का सही विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा अब मेहनतकश किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष गिरदावरी में हुई चूक के चलते प्रतापपुर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों के खेतों में धान की फसल होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनका रकबा दर्ज नहीं है। किसान जब धान बेचने की तैयारी कर रहे हैं, तब उन्हें पता चल रहा है कि पोर्टल में उनका नाम अथवा फसल का रकबा दर्ज नहीं होने के कारण वे धान विक्रय नहीं कर पाएंगे। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर संकट मंडराने लगा है।
तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे किसान
अपनी समस्या के समाधान के लिए किसान लगातार तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। लेकिन किसानों का आरोप है कि उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय कभी गिरदावरी में त्रुटि तो कभी पोर्टल नहीं खुलने का हवाला देकर वापस लौटा दिया जा रहा है। अधिकारी भी गिरदावरी में चूक होने की बात स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसानों की समस्या का ठोस समाधान नहीं हो पाया है।
0 अन्नदाताओं ने सरकार से लगाई न्याय की गुहार
किसानों का कहना है कि जब उनके खेतों में धान की फसल स्पष्ट रूप से मौजूद है, तो आखिर सरकारी रिकॉर्ड में उनका रकबा शून्य कैसे दर्ज हो गया? इसमें किसानों की क्या गलती है? प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा अन्नदाता किसानों को क्यों भुगतना पड़े? किसानों ने शासन-प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि खेतों में वास्तविक रूप से लगी धान की फसल का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए और उसी के आधार पर दोबारा गिरदावरी कराकर पोर्टल में किसानों का रकबा दर्ज किया जाए।
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
किसानों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर गिरदावरी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही पोर्टल में सुधार कर प्रभावित किसानों को धान बेचने का अवसर दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन अन्नदाताओं की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और खेतों में लहलहाती धान की फसल को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
इस विषय में तहसीलदार सुरेश राय ने कहा कि सैकड़ो किसान के आवेदन आ रहे हैं सूरजपुर कलेक्टर से इस विषय में बात करते हुए समस्या का समाधान एवं पोर्टल जो बंद है उसको खोलने के लिए शासन से निर्देश आएगा उसके बाद ही समस्या दूर होगी रोजाना इस तरह की शिकायत आ रही है जिस पर कलेक्टर के दिशा निर्देश पर जारी होगा

