नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक और रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई देते हुए अग्नि-4 (Agni-4) मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) की निगरानी में किया गया। रक्षा सूत्रों के अनुसार, मिसाइल ने सभी तकनीकी और ऑपरेशनल मानकों पर पूरी तरह सफल प्रदर्शन किया।
अवैध संबंध में पति की हत्या: पड़ोसन के घर में देखकर बौखलाई पत्नी, विवाद के दौरान दिया धक्का
64 वर्ष पूर्व मृत हो चुके व्यक्ति की जमीन को फर्जी तरीके से बेचा, मां-बेटी सहित पांच पर अपराध दर्ज
पहली बारिश में बहा लाखों का रपटा, महीनों बाद भी न जांच न कार्रवाई
अग्नि-4 की आधुनिक तकनीक बनी इसकी सबसे बड़ी ताकत
अग्नि-4 को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इसमें पांचवीं पीढ़ी का ऑनबोर्ड कंप्यूटर, उन्नत एवियोनिक्स और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं। उड़ान के दौरान किसी भी संभावित बाधा या विचलन की स्थिति में यह मिसाइल अपने मार्ग को स्वयं सुधारने की क्षमता रखती है, जिससे इसकी सटीकता और विश्वसनीयता काफी बढ़ जाती है।
RINS और MINGS नेविगेशन सिस्टम से अचूक निशाना
मिसाइल में RINS (Ring Laser Gyro-based Inertial Navigation System) और MINGS (Micro Navigation System) का इस्तेमाल किया गया है। इन आधुनिक प्रणालियों की मदद से अग्नि-4 लंबी दूरी तक बिना लक्ष्य से भटके सटीक प्रहार करने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत की रणनीतिक ताकत को और मजबूत बनाती है।
4000 डिग्री सेल्सियस तापमान भी नहीं रोक पाया अग्नि-4
अग्नि-4 की सबसे बड़ी खासियत इसकी री-एंट्री हीट शील्ड है। वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान लगभग 4000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान उत्पन्न होने के बावजूद मिसाइल की बाहरी संरचना सुरक्षित रही। वहीं, अंदर मौजूद संवेदनशील उपकरणों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से कम बनाए रखा गया, जिससे इसकी तकनीकी मजबूती साबित हुई।
3000 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता
भारत के रणनीतिक मिसाइल बेड़े में पहले से अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और पृथ्वी जैसी मिसाइलें शामिल हैं। अब अग्नि-4 के सफल परीक्षण के साथ भारत की 3000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और मजबूत हो गई है। यह सफलता देश की रक्षा तैयारियों और सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती प्रदान करती है।


