मध्य प्रदेश:
“अगर कंचन बाई ने हिम्मत नहीं दिखाई होती तो न जाने कितने बच्चे मर जाते.”
मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले के रानपुर गाँव में जिससे बात कीजिए वह यही कहते हुए कंचन बाई की बहादुरी और साहस की कहानी सुना रहा है. दरअसल, ज़िला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर बसे रानपुर का आंगनबाड़ी परिसर सोमवार दो फ़रवरी की दोपहर मधुमक्खियों के हमले की चपेट में आ गया. जहाँ आमतौर पर बच्चों की हँसी और शरारतें सुनाई देती हैं, वहाँ अचानक चीख पुकार की आवाज़ आने लगी. इसी आंगनबाड़ी परिसर में दोपहर दो बजे से प्राथमिक स्कूल चलता है. ग्रामीण बताते हैं कि क़रीब साढ़े तीन बजे का समय था, जब आंगनबाड़ी के आसपास मौजूद बच्चों पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा. उस वक़्त परिसर में क़रीब 20 से 25 बच्चे थे.
15 चौके, 15 छक्के, वैभव सूर्यवंशी तूफानी 175 रन बनाकर हुए आउट
अवैध कोयला खदान में धमाके से 18 मज़दूरों की मौत, कइयों के फंसे होने की आशंका
‘बच्चों को बचाने दौड़ पड़ीं’
स्कूल की एक शिक्षिका गुणसागर जैन बताती हैं, “मधुमक्खियां सीधे बच्चों की ओर बढ़ रही थीं और पूरी तरह से अफ़रा तफ़री का माहौल हो गया था.”
उसी समय वहाँ मौजूद 55 साल की आंगनबाड़ी सहायिका कंचन बाई ने हालात को भांपा और बच्चों को बचाने दौड़ पड़ीं.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कंचन बाई ने बिना समय गंवाए बच्चों को भीतर की ओर ले जाना शुरू किया. उन्होंने पहले आंगनबाड़ी में रखी दरियां और कंबल निकालकर बच्चों को ढका और फिर अपनी साड़ी से बच्चों को बचाने का प्रयास किया.
उनके इस साहसी क़दम ने लगभग 25 बच्चों की जान बचा ली, जिसमें उनका अपना पोता भी शामिल था लेकिन वह ख़ुद मधुमक्खियों के हमले में बुरी तरह घायल हो गई थीं.
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
नीमच के पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने मीडिया से कहा, “यह सोमवार दोपहर की घटना है, जब जावद थाना अंतर्गत रानपुर गांव की आंगनबाड़ी में मधुमक्खियों ने हमला कर दिया था. इसी दौरान वहां काम करने वाली कंचन बाई ने बच्चों को बचाने का प्रयास किया. कंचन बाई को मधुमक्खियों ने घायल कर दिया था, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई”.

