सूरजपुर। 23 जुलाई। सूजरपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम कारीमाटी के परसिया (पड़ोपारा) से सामने आई तस्वीरें ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर रही हैं। यहां प्राथमिक विद्यालय जाने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा का रास्ता आज भी जोखिमों से होकर गुजरता है। गांव के पंचायत भवन के समीप स्थित मरघेटिया नाला बारिश के दिनों में उफान पर रहता है। नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे स्वयं इसे पार नहीं कर पाते। ऐसे में उनकी सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर संकट मंडराता रहता है।
इसी बीच गांव के एक किसान ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए प्रतिदिन अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों को एक-एक कर अपने कंधे पर बैठाकर उफनता नाला पार कराता है, ताकि वे सुरक्षित विद्यालय पहुंच सकें और उनकी पढ़ाई बाधित न हो। एक ओर यह दृश्य इंसानियत का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर यह ग्रामीण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
0 मनरेगा से स्वीकृत हुआ था कार्य, निजी भूमि पर स्टे के कारण रुका निर्माण
इस संबंध में जनपद पंचायत भैयाथान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि जिस स्थान की बात की जा रही है, वहां मनरेगा के तहत कार्य स्वीकृत हुआ था और निर्माण कार्य शुरू भी किया गया था लेकिन मार्ग के एक हिस्से में निजी भूमि होने के कारण संबंधित भूस्वामी द्वारा न्यायालय से स्टे प्राप्त कर लिया गया, जिसके चलते निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। बाद में उक्त कार्य को निरस्त करना पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि जिस क्षेत्र के बच्चों के उफनते नाले को पार कर विद्यालय जाने की बात सामने आ रही है, उस क्षेत्र में पहले प्राथमिक विद्यालय संचालित था। उनके अनुसार, वहां पदस्थ एक शिक्षक के कथित अनुचित आचरण से नाराज होकर अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम उस विद्यालय से कटवाकर दूसरे क्षेत्र के विद्यालय में प्रवेश दिला दिया। समय रहते शिक्षक का परिवर्तन नहीं हो सका और बाद में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण विभाग ने उस विद्यालय को बंद कर दिया। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति इन्हीं परिस्थितियों का परिणाम है।
फिलहाल गांव का एक किसान अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था का स्थायी विकल्प नहीं हो सकता। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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