नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 19 फरवरी को ईरान को चेतावनी दी थी कि उसके पास समझौते करने के लिए 10 से 15 दिन हैं। अगर समझौते नहीं किए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप की चेतावनी के 10 दिन की समय सीमा समाप्त होते ही ट्रंप ने ईरान पर हमला कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दिए गए चेतावनी के ठीक 10 दिन के बाद शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने हमला किया। यह हमला ईरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास हुआ।
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अमेरिका ने पहले ही मजबूत की थी सैन्य स्थिति
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए हमले ने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है। ईरान पर हमले से बहुत पहले अमेरिका ने ईरान के चारों तरफ अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर ली थी।
डेडलाइन करीब आते ही बढ़ने लगी थी चिंता
ट्रंप द्वारा तय की गई 10 दिन की समय सीमा जैसे-जैसे समाप्त होने लगी, क्षेत्रीय चिंताएं चरम पर पहुंच गई। रूस, यूरोपीय सरकारों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने सावधानी बरतने को कहा। वहीं, विश्लेषकों ने खुले तौर पर यह अनुमान जताया कि यदि ट्रंप की समय सीमा बिना किसी समझौते के समाप्त हो जाती है तो क्या होगा?
ट्रंप द्वारा तय की 10 दिन की समय सीमा समाप्त होते ही ईरान की राजधानी तेहरान में इजारयल और अमेरिका ने हमला करना शुरू कर दिया। इजारायल और अमेरिका ने इसे एक प्रिवेंटिव मिसाइल हमला करार दिया है, जिसे ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया है।
ईरान पर क्यों हुआ हमला?
गौरतलब है कि 2025 के ईरान-इजराइल युद्ध और ईरान समर्थित समूहों के साथ कई झड़पों के बाद भी तनाव में चल रहे इजराइली नेताओं ने जनवरी में ही ईरान को बार-बार चेतावनी दिया था कि वे उसके परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को अनियंत्रित रूप से बढ़ने नहीं देंगे।
चेतावनी के बावजूद ईरान संवेदनशील परमाणु और मिसाइल संबंधी गतिविधियां जारी रखे हुए है। बार-बार चेतावनी के बावजूद न मानने के बाद इजरायल-अमेरिका ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला किया। जिसके बाद से मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है।

