अंबिकापुर। 05 सितम्बर।
शहर से लगे ग्राम अजिरमा निवासी स्व. कौन्तेय जायसवाल द्वारा वर्ष 1986 में लिया गया नेत्रदान का संकल्प उनके निधन के बाद परिजनों के निर्णय से पूर्ण हो सका। परिजनों की सहमति से कौन्तेय जायसवाल की मृत्यु पश्चात शुक्रवार, 04 सितम्बर को नेत्रदान पखवाड़े के दौरान जिला नोडल अधिकारी अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. रजत टोप्पो के मार्गदर्शन में जायसवाल परिवार द्वारा इस अनुकरणीय पहल को साकार किया गया।
स्व. कौन्तेय जायसवाल, जायसवाल समाज के संरक्षक एवं जायका मसाला फैक्ट्री के संचालक थे। उनके द्वारा लिए गए संकल्प को उनके पुत्र अजय जायसवाल, केंद्रीय विद्यालय अंबिकापुर के द्वारा पूरा किया गया। यह न केवल जायसवाल परिवार बल्कि पूरे सरगुजा अंचल के लिए एक अनुकरणीय एवं प्रेरणादायक पहल है। प्रबुद्ध परिवारों के आगे आने से निश्चित ही जिले में नेत्रदान को एक नया आयाम मिलेगा और कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे मरीजों को नई रोशनी मिल सकेगी। बता दें कि सरगुजा में यह सातवां नेत्रदान है।
रात 11 बजे आई बॉल बिलासपुर रवाना
आई बॉल को निकालने की प्रक्रिया डॉ. अभिजीत जैन, डॉ. अभिषेक, रमेश घृतकर, आरती सारथी व जयप्रकाश विश्वकर्मा, नेत्र सहायक अधिकारी द्वारा की गई और नेत्रदान के संकल्प को साकार किया गया। नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य में रेड क्रॉस के आजीवन सदस्य आर्यन सिन्हा का भी सहयोग रहा। नेत्रदान उपरांत तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को के निर्देश पर मो. शाहिद हुसैन, नेत्र सहायक अधिकारी को निकाले गए नेत्रों के साथ रात को 11 बजे ही सिम्स आई बैंक बिलासपुर के लिए रवाना किया गया। आगामी एक-दो दिन में दो अंधत्व से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों को कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किया जाएगा, जिससे कॉर्नियल जनित अंधत्व से उन्हें रोशनी दुबारा मिलेगी। एक नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को रोशनी मिलेगी।
नेत्रदान समाज के लिए एक मिशन
जिला नोडल अधिकारी अंधत्व अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि जिला सरगुजा में नेत्रदान पखवाड़े के अंतिम 04 दिवस पूर्व किया गया यह नेत्रदान समाज के लिए एक मिशन साबित होगा।
चालीस वर्ष पूर्व लिया संकल्प
अक्सर लोग नेत्रदान को लेकर भ्रांतियों में रहते हैं, लेकिन स्व. कौन्तेय जायसवाल ने 1986 में ही यह संकल्प लेकर समाज को संदेश दिया है कि, मृत्यु के बाद भी हम किसी की दुनिया रोशन कर सकते हैं। उनके पुत्र अजय जायसवाल ने पिता के इस वचन को निभाकर समाज के सामने एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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