बिलासपुर। 06 अपै्रल। एजेंसी।
2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की अपील स्वीकार कर ली। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बरी करने का ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया गया।
अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्हें आज आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त छह माह के सश्रम कारावास की सजा दी जाएगी। हाईकोर्ट का यह निर्णय 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह से पलट देता है।
उस समय स्पेशल जज रायपुर ने अमित जोगी को बरी कर दिया था। हालांकि, चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही गवाही पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना कानूनी रूप से असंगत और गलत है। यह फैसला 2003 के चर्चित हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोला गया था। इसके बाद ही हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपना निर्णय दिया।
यह फैसला न्याय प्रणाली में समानता और निष्पक्षता के महत्व को दर्शाता है। अदालत ने एक ही साक्ष्य के आधार पर अलग-अलग निर्णय को असंगत बताया। इस निर्णय से 2003 के चर्चित हत्याकांड में न्याय की उम्मीदें बढ़ी हैं। अमित जोगी को अब आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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